श्रीमद् भागवत महापुराण

महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित 18 पुराणों में श्रीमद्भागवत सबसे श्रेष्ठ एवं पवित्र पुराण है । यह पुराण समस्त पुराणों का सार है । इस महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण (विष्णु अवतार) की अनेक लीलाओं और कथाओं का सुंदर वर्णन विस्तार से किया गया है । 'श्रीमद्भागवत पुराण' में भगवान श्रीकृष्ण के ईश्वरीय और अलौकिक रूप का दिव्य वर्णन किया गया है। कथाओं के अलावा इस महापुराण में भगवान के भक्तों और उनकी मुक्ति की कथाओं का भी विस्तार से वर्णन किया गया है । ...और पढ़ें

शिव महापुराण

हिंदू पौराणिक ग्रन्थों में शिवपुराण एक सुप्रसिद्ध पुराण हैं जिसमे भगवान् शिव के विभिन्न कल्याणकारी स्वरूपों, भगवान शिव की महिमा, शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म और शिव उपासना का विस्तृत में वर्णन किया गया है. भगवान् शिव की लीलाओं एवं कथाओं के अतिरिक्त इस पुराण में विभिन् प्रकार की पूजा पद्यतियों और ज्ञानप्रद शिक्षाओं का उल्लेख भी किया गया है. वैसे तो यह माना जाता है कि मूल शिवमहापुराण में श्लोकों की संख्या १ लाख थी लेकिन महर्षि वेद व्यास जी ने इसको २४ ...और पढ़ें

देवी भागवत कथा

श्रीमदेवी भागवत महापुराण में तीनों लोकों की जननी माँ पराम्बा भगवती की महिमा बताई गयी है। जगदम्बा पराम्बा की विभिन्न लीलाओं और कथाओं का अमृतपान भगवान् श्री वेदव्यास जी ने इस पुनीत ग्रन्थ के माध्यम से जन-समुदाय को कराया है। १८ पुराणों में श्रीमदेवीभागवतमहापुराण का अत्यंत महिमामय स्थान है। पुराणों के क्रमानुसार यह पांचवा पुराण है जिसमे परमब्रह्म परमात्मा (ईश्वर) के मातृरूप और उसकी उपासना, महिमा का वर्णन माँ भगवतीआध्यशक्ति के रूप ...और पढ़ें

Latest Video


कथा वाचक आचार्य श्री विपिन कृष्ण काण्डपाल जी- एक संक्षिप्त परिचय

यह भारत भूमि प्राचीन काल से ही ऋषि-मुनियों, तपसियों और महान विभूतियों की भूमि रही है । जब-जब भी इस धरती पर किसी प्रकार का अनाचार या अत्याचार बढ़ा या धर्म की हानि हुई है तब तब भगवत कृपा से किसी न किसी पुण्य आत्मा ने इस पृथ्वी पर जन्म लेकर समाज में नई चेतना जागृत करने के लिये, सुसंस्कारित और सभ्य समाज बनाने के लिये, सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिये, विश्व में धर्म और आध्यात्म के माध्यम से शान्ति, भक्ति व ज्ञान की ज्योति जलाई है जिससे मानव जीवन का कल्याण हुआ है। जब बात बद्री-केदार देवभूमि उत्तराखंड की होती है तो इसके बारे में जितनी चर्चा की जाय उतनी ही कम है। हमारे धर्म शास्त्र पुराण कहते हैं कि यह हिमालय भूमि उत्तराखंड देवताओं की निवास स्थली रही है। इसके कण-कण, पग-पग पर देवता लोग निवास करते हैं । यह उत्तराखण्ड भूमि भगवान शिव की तपस्थली रही है । ऐसी मान्यता है कि भगवान् वेद व्यास ने इसी भूमि में विभिन् पुराणों की रचना की है, माँ भगवती गंगा/यमुना का उद्गम स्थान होने का गौरव भी इसी उत्तराखण्ड की भूमि को प्राप्त हुआ है । इसी बद्री-केदार देवभूमि उत्तराखंड के कथा वाचकों की सूची में आचार्य विपिन कृष्ण काण्डपाल जी का नाम आज एक जाना-पहिचाना नाम बन चुका है । श्रीमदभागवत महापुराण, श्री शिव महापुराण और देवी भागवत महापुराण के मर्मग्य कथा वाचक आचार्य श्री विपिन कृष्ण काण्डपाल जी का जन्म 14 अक्टूबर 1985 को गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग जिल्ले के अंतर्गत दशज्यूला पट्टी के ग्राम बैंजी काण्डई ग्राम में पंडित उमाशंकर शास्त्री/श्रीमती शशि देवी काण्डपाल जी के यहाँ हुआ ।